View Single Post
  #2268  
Old 29th June 2013
ashokafun30's Avatar
ashokafun30 ashokafun30 is offline
Jawani ke maje loot DUDE
 
Join Date: 18th February 2010
Location: delhi
Posts: 12,061
Rep Power: 36 Points: 17789
ashokafun30 is one with the universeashokafun30 is one with the universeashokafun30 is one with the universeashokafun30 is one with the universeashokafun30 is one with the universeashokafun30 is one with the universeashokafun30 is one with the universeashokafun30 is one with the universeashokafun30 is one with the universeashokafun30 is one with the universeashokafun30 is one with the universeashokafun30 is one with the universe
UL: 160.62 mb DL: 522.03 mb Ratio: 0.31
वो ये सब कर रहे थे, इसी बीच पंडित जी दूकान पर आ पहुंचे ..


वहां कोई नहीं था ..उन्होंने टाईम देखा ,पांच बजने में आधा घंटा था , मतलब इरफ़ान भी तो शायद निकल चुके होंगे ..यानी दूकान इस वक़्त नूरी के भरोसे थी ..पर वो है कहाँ , वो ये सोच ही रहे थे की उन्हें दूकान के अन्दर से नूरी की सिसकारी की आवाज आई ..


पंडित जी समझ गए की नूरी जरुर कुछ गड़बड़ कर रही है ..

वो धीरे से अन्दर दाखिल हो गए ..और पीछे वाले कमरे में जाकर आते की बोरी के पीछे छुप गए ..और वहां से जो उन्होंने देखा उसे देखकर उनका शक पक्का हो गया ..


सुलेमान ने नूरी को बुरी तरह से पकड़ा हुआ था और उसकी गर्दन को अपनी जीभ से चाट रहा था ..


*******
अब आगे
*******


पंडित ने एक पल के लिए तो सोचा की नूरी को अपनी उपस्थिति का एहसास कराये पर कुछ सोचकर वो खुद रुक गए .. क्योंकि उनके दिमाग में अचानक एक बात आ गयी थी ..इसलिए वो वेट करने लगे ,और उन दोनों का खेल देखने में लग गए .


सुलेमान ने धीरे - २ नूरी के सूट की कमीज को ऊपर की तरफ खींचकर निकालना शुरू कर दिया ..


वो मचल रही थी ..और मचलते हुए बोली : "ये क्या कर रहे हो तुम ...''


सुलेमान : "तुमने भी तो दूध पीने के लिए थेली को फाड़ा था ..मैं तो थेली को उतार रहा हु ..''


इतना कहते हुए उसने उसकी शर्ट को उतार फेंका ..


उसके बाद का नजारा देखकर तो सुलेमान की कुत्ते जैसी जीभ ऐसे बाहर आ गयी जैसे उसने गोश्त का भण्डार देख लिया हो ..और था भी वो नजारा ऐसा ही ..ब्लेक ब्रा के अन्दर उसके मोटे मुम्मे किसी लबाबदार डिश जैसे लग रहे थे ..जिन्हें वो अपनी जीभ और दांतों से चबा जाना चाहता था ..


उसने अपनी जीभ को उसके उभारों पर फिर से फेराया ..सुलेमान की जीभ की गर्मी और उसकी लार की ठंडक अपने जिस्म पर पाकर वो कांप सी गयी ..


अगले ही पल उसके मोटे हाथों ने उसकी ब्रा के कप नीचे खिसका दिए ..और उसके मजेदार , लज्जतदार , रसीले और मोटे मुम्मे उछल कर बाहर निकल आये ..जिनपर किशमिश जैसे काले रंग के दाने लगे हुए थे ..


सुलेमान ने अपना मुंह पूरा खोल और एक मुम्मे का गोश्त अपने मुंह में ठूस कर उसे जोर से चूसने लगा ..


उसकी ब्रा अभी तक वहीँ की वहीँ थी ..और सुलेमान ने सिर्फ उसकी ब्रेस्ट को बाहर निकाला था , ऐसा एहसास उसने आज तक नहीं पाया था ..वो फिर से सुलेमान के सर को अपनी छाती से दबा कर उसे बच्चों की तरह प्यार करते हुए उसे अपना दूध पिलाने लगी ..


थोड़ी देर चूसने के बाद उसने दूसरी तरफ का भी दूध पीया ..और थोडा चूसने के बाद उसने सर ऊपर उठाया और धीरे से बोला


''इस मदर डेयरी के दूध का मुकाबला कोई नहीं कर सकता ...''


उसकी बात सुनकर नूरी मुस्कुरा दी ..और उसका सर पकड़कर उसके होंठों को जोर जोर से चूसने लगी ..



नूरी ने उसका सर पकड़कर वापिस अपने निप्पल पर लगा दिया ..जैसे कह रही हो ..'बातें कम कर ..काम पर ध्यान दे तू .'


उसने दुसरे हाथ से उसकी ब्रा के स्ट्रेप को खींचकर नीचे गिरा दिया ..और उसकी ब्रा उसके पेट पर जाकर अटक गयी ..


अब उसकी दोनों छातियाँ सुलेमान के सामने थी , जैसे थाली में दो खरबूजे सजा दिए हो ,खाने के लिए .

सुलेमान भी दिल खोल कर सिर्फ उन्हें खा ही नहीं रहा था, बल्कि दबा रहा था, निचोड़ रहा था , पी रहा था , जैसे सच में उसमे से दूध की धार निकलेगी और उसकी प्यास बुझा देगी ..

पर दूध की धार निकलने में तो अभी नौ महीने का समय था ..अभी -२ तो पंडित जी ने बीज बोया था उसके अन्दर ..दूध निकलने में टाईम तो लगेगा ही न ..


तभी नूरी के हाथ फिसल कर सुलेमान के लंड के ऊपर चला गया ..उसने उसे जोर से पकड़ कर दबा दिया ..उसकी सलवार के नाड़े को खोलकर उसने झट से नीचे गिरा दिया ..और अंडरवीयर के अन्दर हाथ डालकर उसके रेजिमेंट के सिपाही को अपने सामने तलब कर लिया ..


''वाव ....क्या लंड है तेरा सुलेमान । ''


नूरी ने जैसे ही उसे देखा वो अपनी आँखे फेला कर बोली


वो बिलकुल काले रंग का था ..पर मोटा काफी था , एक खीरे जितना मोटा ..और उतना ही लम्बा ..

Last edited by ashokafun30 : 29th June 2013 at 04:56 PM.

Reply With Quote
Page generated in 0.01623 seconds