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#2581
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साथ हो तुम और रात जवाँ . . .
फिल्म : काँच की गुडिया ( १९६१ )
गीत : शैलेन्द्र संगीत : सुहर्द कर स्वर : मुकेश , आशा भोंसले साथ हो तुम और रात जवाँ नींद किसे अब चैन कहाँ कुछ तो समझ ऐ भोले सनम कहती है क्या नज़रों की ज़ुबाँ महकती हवा, छलकती घटा हमसे ये दिल, सम्भलता नहीं की मिन्नतें, मनाकर थके करें क्या ये अब तो, बहलाता नहीं देख के तुमको, महकने लगा लो बहकने लगा, हसरतों का जहाँ हम इस राह पे, मिले इस तरह के अब उम्र भर, न होंगे जुदा मेरे साज़-ए-दिल की आवाज़ तुम मैं कुछ भी नहीं तुम्हारे बिना आओ चलें हम, जहाँ प्यार से वो गले मिल रहे, हैं ज़मीं आस्मां |
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#2582
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जा जा जा रे तुझे हम जान गये . . .
फिल्म : सेहरा ( १९६३ )
गीत : हसरत जयपुरी संगीत : रामलाल स्वर : मोहम्मद रफ़ी , लता मंगेशकर कली कब तक छुपेगी एक भँवरे की निगाह से चमक जाती है बिजली खुद ही इन गहरी घटाओं में बरस पड़ती है शबनम आप ही ठण्डी फ़िज़ाओं से अरे जा जा! जा जा जा रे तुझे हम जान गये कितने पानी में हो पहचान गये तुम कितने पानी में हो पहचान गये जा जा जा रे तुझे हम जान गये आ~ किनारे आ के लहरों का इशारा देखने वाले तुझे अपनी खबर भी है नज़ारा देखने वाले तमशा खुद न बन जाना तमशा देखने वाले जा जा जा जा जा रे तुझे हम जान गये आ~ बदल कर भेस परवाने का शमा झिलमिलाती है नशीली शाम के पर्दे में सुबह मुस्कुराती है वो शोला हो कि चिंगरी मचल कर नाच जाती है तो धड़कते दिल से मेरे मदभरी आवाज़ आती है जा जा अरे जा जा जा जा जा रे तुझे हम जान गये आ~ शमा से बच के रहना सारी तन मन को जला देगी वो शोला हो कि चिंगरी लगी में और लगा देगी सुबह जब मुस्कुरायेगी तो वो तूफ़ान उठा देगी खुलेगा शाम क पर्दा वो तुझ को भी मिटा देगी जा जा जा जा जा रे तुझे हम जान गये आ~ ये काली रेशमी ज़ुल्फ़ें शराबी नैन के प्याले ये दिल का हाल कह देते हैं दोनों ये ही मतवाले नहीं डरते किसी से जीत कर भी हारने वाले क़यामत की नज़र रखते हैं लेकिन ताड़ने वाले जा जा जा जा जा रे तुझे हम जान गये आ~ ये ज़ुल्फ़ें तो नहीं डसने वाले नाग हैं काले ये दो आँखें नहीं ज़हर से भर्पूर हैं प्याले तू आँखें रख के भी बेहोश है अरे ताड़ने वाले क़यामत सामने है जान के पड़ जायेंगे लाले जा जा जा जा जा रे तुझे हम जान गये |
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#2583
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तुम तो प्यार हो सजना तुम तो प्यार हो . . .
फिल्म : सेहरा ( १९६३ )
गीत : हसरत जयपुरी संगीत : रामलाल स्वर : मोहम्मद रफ़ी , लता मंगेशकर ल : तुम तो तुम तो प्यार हो सजना तुम तो प्यार हो मुझे तुमसे प्यारा और न कोई तुम तो प्यार हो सजना र : तुम तो प्यार हो सजनी तुम तो प्यार हो मुझे तुमसे प्यारा और न कोई तुम तो प्यार हो ल : आ कितना है प्यार हमसे ये तो बता दो र : अ.म्बर पे तारे जितने इतना समझ लो ल : सच मेरी क़सम र : तेरी क़सम तेरी याद हमें लूटे ल : क़समें तो खाने वाले होते हैं झूठे चलो जाओ हटो जाओ दिल का दामन छोड़ो र : तुम तो प्यार हो सजनी ... हो ओ आके न जाए कभी ऐसी बहार हो ल : तुम भी हमारे लिए जीवन सिंगार हो र : सच मेरी क़सम ल : तेरी क़सम तू है आँख के तिल में र : तुम भी छुपी हो मेरे शीशा-ए-दिल में ओ मेरे हमदम मेरे हमदम मेरी बात तो मानो ल : तुम तो प्यार हो सजना ... दो : तुम तो प्यार हो |
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#2584
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पंख होते तो उड़ आती, रसिया ओ ज़ालिमा . . .
फिल्म : सेहरा ( १९६३ )
गीत : हसरत जयपुरी संगीत : रामलाल स्वर : लता मंगेशकर पंख होते तो उड़ आती, रसिया ओ ज़ालिमा तुझे दिल का दाग़ दिखलाती किरनें बन के बाहें फैलायी आस के बादल पे जाके लहरायी दूर से देखा मौसम हसीं था आनेवाले तू ही नहीं था रसिया ओ ज़ालिमा तुझे दिल का दाग दिखलाती ... यादों में खोयी पहुँची गगन में पंछी बन के सच्ची लगन में झूल चुकी मैं वादे का झूला तू तो अपना वादा ही भूला रसिया ओ ज़ालिमा तुझे दिल का दाग दिखलाती ... |
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#2585
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तक़दीर का फ़साना जाकर किसे सुनाएं . . .
फिल्म : सेहरा ( १९६३ )
गीत : हसरत जयपुरी संगीत : रामलाल स्वर : मोहम्मद रफ़ी / लता मंगेशकर तक़दीर का फ़साना जाकर किसे सुनाएं इस दिल में जल रही हैं अरमान की चिताएं साँसों में आज मेरे तूफ़ान उठ रहे हैं शहनाईओं से कह दो कहीं और जा के गाएं इस दिल में जल रही हैं अरमान की चिताएं मतवाले चाँद सूरज तेरा उठाये डोला तुझको खुशी की परियाँ घर तेरे ले के जाएं इस दिल में जल रही हैं अरमान की चिताएं तुम तो रहो सलामत सेहरा तुम्हे मुबारक मेरा हर एक आँसू देने लगा दुआएं इस दिल में जल रही हैं अरमान की चिताएं |
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#2586
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#2587
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मैं जब भी अकेली होती हूँ . . .
फिल्म : धरम पुत्र ( १९६१ )
गीत : साहिर लुधियानवी संगीत : एन. दत्ता स्वर : आशा भोंसले मैं जब भी अकेली होती हूँ, तुम चुपके से आ जाते हो और झाँक के मेरी आँखों में, बीते दिन याद दिलाते हो बीते दिन याद दिलाते हो मस्ताना हवा के झोँकों से हर बार वो पर्दे का हिलना पर्दे को पकड़ने की धुन में दो अजनबी हाथों का मिलना आँखों में धुआँ सा छा जाना साँसों में सितारे से खिलना बीते दिन याद दिलाते हो, बीते दिन याद दिलाते हो मुड़-मुड़ के तुम्हारा रस्ते में तकना वो मुझे जाते-जाते और मेरा ठिठक कर रुक जाना चिलमन के क़रीब आते-आते नज़रों का तरस कर रह जाना एक और झलक पाते-पाते बीते दिन याद दिलाते हो, बीते दिन याद दिलाते हो बालों को सुखाने के ख़ातिर कोठे पे वो मेरा आ जाना और तुमको मुक़ाबिल पाते ही कुछ शर्माना कुछ बलखाना हमसायों के डर से कतराना, घर वालों के डर से घबराना बीते दिन याद दिलाते हो, बीते दिन याद दिलाते हो बरसात के भीगे मौसम में, सर्दी की ठिठुरती रातों में पहरों वो यूँ ही बैठे रहना हाथों को पकड़कर हाथों में और ल.म्बी ल.म्बी घड़ियों का कट जाना बातों बातों में बीते दिन याद दिलाते हो, बीते दिन याद दिलाते हो रो-रो के तुम्हें ख़त लिखती हूँ रो-रो के तुम्हें ख़त लिखती हूँ और ख़ुद पढ़कर रो लेती हूँ हालात के तपते तूफ़ां में जज़्बात की कश्ती खेती हूँ कैसे हो? कहाँ हो? कुछ तो कहो, मैं तुम को सदाएं देती हूँ मैं जब भी अकेली होती हूँ मैं जब भी अकेली होती हूँ, तुम चुपके से आ जाते हो और झाँक के मेरी आँखों में, बीते दिन याद दिलाते हो बीते दिन याद दिलाते हो |
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#2588
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दुनिया में ऐसा कहाँ सबका नसीब है . . .
फिल्म : देवर ( १९६६ )
गीत : आनंद बक्षी संगीत : रोशन स्वर : लता मंगेशकर आप आ जाएँ तो दिल को क़रार आ जाए दुनिया में ऐसा कहाँ सबका नसीब है कोई-कोई अपने पिया के करीब है दुनिया में ऐसा ... दूर ही रहते हैं उनसे किनारे जिनको न कोई माँझी पार उतारे -२ साथ है माँझी तो किनारा भी करीब है दुनिया में ऐसा ... चाहे बुझा दे कोई दीपक सारे प्रीत बिछाती जाए राहों में तारे -२ प्रीत दीवानी की कहानी भी अजीब है दुनिया में ऐसा ... बरखा की रुत हो या दिन हों बहार के लगते हैं सूने-सूने बिन तेरे प्यार के -२ तू है तो ज़िन्दगी को ज़िन्दगी नसीब है दुनिया में ऐसा ... |
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#2589
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आया है मुझे फिर याद वो ज़ालिम . . .
फिल्म : देवर ( १९६६ )
गीत : आनंद बक्षी संगीत : रोशन स्वर : मुकेश आया है मुझे फिर याद वो ज़ालिम गुज़रा ज़माना बचपन का हाय रे अकेले छोड़ के जाना और ना आना बचपन का आया है मुझे फिर याद वो ज़ालिम वो खेल वो साथी वो झूले वो दौड़ के कहना आ छू ले हम आज तलक भी ना भूले - २ वो ख्वाब सुहाना बचपन का आया है मुझे फिर याद वो ज़ालिम इसकी सबको पहचान नहीं ये दो दिन का मेहमान नहीं मुश्किल है बहुत, आसान नहीं - २ ये प्यार भुलाना बचपन का आया है मुझे फिर याद वो ज़ालिम मिल कर रोये फ़रियाद करें उन बीते दिनों की याद करें ऐ काश कहीं मिल जाये कोई - २ वो मीत पुराना बचपन का आया है मुझे फिर याद वो ज़ालिम |
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#2590
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बहारों ने मेरा चमन लूटकर . . .
फिल्म : देवर ( १९६६ )
गीत : आनंद बक्षी संगीत : रोशन स्वर : मुकेश बहारों ने मेरा चमन लूटकर खिज़ां को ये इल्ज़ाम क्यों दे दिया किसीने चलो दुश्मनी की मगर इसे दोस्ती नाम क्यों दे दिया बहारों ने मेरा ... मैं समझा नहीं ऐ मेरे हमनशीं सज़ा ये मिली है मुझे किस लिये (२) के साक़ी ने लब से मेरे छीन कर किसी और को जाम क्यों दे दिया बहारों ने मेरा ... मुझे क्या पता था कभी इश्क़ में रक़ीबों को कासिद बनाते नहीं (२) खता हो गई मुझसे कासिद मेरे तेरे हाथ पैगाम क्यों दे दिया बहारों ने मेरा ... खुदाया यहाँ तेरे इन्साफ़ के बहुत मैंने चर्चे सुने हैं मगर (२) सज़ा की जगह एक खतावार को भला तूने ईनाम क्यों दे दिया बहारों ने मेरा चमन लूटकर खिज़ां को ये इल्ज़ाम क्यों दे दिया ... |